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Friday, 23 June 2017

कई अर्सा हो गया

कई अर्सा हो गया
तुम्हारी मुस्कराहट देखे हुए
कई ......
तुम्हारा झूठा खाए हुए
कई ......
मेरी हर बात पे"हाँ ठीक है " किये हुए
ये सब सुनने के लिए
आज भी मेरा दिल बेक़रार है

शीरीं मंसूरी "तस्कीन"

Thursday, 22 June 2017

आखिरी दिन

साल का आखिरी दिन था
सब भूल के नयी जिन्दगी की ओर
बढ़ने लगी थी मैं
अचानक आकर यूँ मेरी जिन्दगी में
सब रंग भर गए थे तुम
सोचा था मंजिल मिल गई मुझे
अंजान थी में खुद से
 
जो तुझ पर भरोसा कर बैठी

शीरीं मंसूरी " तस्कीन "

Wednesday, 21 June 2017

बहुत दूर चला गया

गम आज मुझसे बहुत दूर चला गया
कहता है यहाँ बहुत अँधेरा है

शीरीं मंसूरी " तस्कीन "

Tuesday, 20 June 2017

लाख मुखोटे

अपने चहरे पे तुमने लगाये हैं
यूँ अच्छाई के लाख मुखोटे
ढूँढने निकलूँ बुराई को दुनिया में
तो तुम सा बुरा न कोई पायेगा

शीरीं मंसूरी " तस्कीन "

Monday, 19 June 2017

होसलों और उम्मीदों

मैं सागर की रेत, तुम सागर की लहर
मैं होंसलों और उम्मीदों से
सागर की रेत से घर बनाती हूँ

और तुम हमेशा की तरह
मेरे होसलों और उम्मीदों से बने घर को
हर बार की तरह तोड़ कर चले जाते हो


शीरीं “तस्कीन”

Sunday, 18 June 2017

ज़िन्दगी का सफ़र

ज़िन्दगी का सफ़र किसी ने न जाना 


मैं अंजानी तू बेगाना 

शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'


Saturday, 17 June 2017

गलती तेरी नहीं

गलती तेरी नहीं मेरी थी जो
मेरी आँखें तेरा दिल न पढ़ पायीं

शीरीं मंसूरी 'तस्कीन'