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Tuesday, 28 November 2017

प्रिय, तुम्हारे जन्मदिवस पर,

प्रिय,
तुम्हारे जन्मदिवस पर,मैं तुम्हें दें न सकी कुछ भी
किसे ने तुम्हें कमल दिया,किसी ने तुम्हें रोज़(गुलाब)
पर मैं तुम्हारे लिए अल्लाह से दुआ मांगती हूँ हर
रोज़
मुझे मिले खार(कांटे),तुम्हें मिले गुलशन
करती हूँ ऊपर वाले से दुआ ये हर रोज
मुझे मिले गम , तुम्हें मिले ख़ुशी
ये कहती हूँ ऊपर वाले से हर रोज
मिले तो मुझे कई लोग पर तुम्हारे जैसा न मिला कोई और
दुआएँ तो की है हर किसी के लिए
पर तुम्हारे लिए दुआ है कुछ और
ऊपर वाले ने तुम में गढ़ी हैं यूँ खूबियाँ
सारी अच्छाइयाँ को भर कर तुम्हारे अन्दर उन्हें कैद कर दिया है
पहचान है तुम्हारी सबसे अच्छे हो तुम इस जहाँ में
मिले चमन भरी जिन्दगी तुम्हें यूँ उम्र भर
जियो हज़ारों साल तुम यही दुआ करती हूँ मैं हर रोज
आये कभी न आँसू तुम्हारी प्यारी आँखों में ऐ मेरे दोस्त
फूलों से महके तुम्हारी जिन्दगी हँसते रहो तुम यूँ ही हर रोज
चमको तुम ऐसे जैसे चमकता है ध्रुव तारा
दिल से दुआ है मेरी यूँ मुस्कुराओ तुम यूँ ही हर रोज

शीरीं "तस्कीन"

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